निभा झा(जनकपुर) कहलेल नारी आदि शक्ती अछि,
पुजल जाइत अछि भगवतीक नाम मे।
मुद्दा बालात्कृत बालीकाके शव,
किया भेतैत अछि फेकल बिभिन्न ठाँम मे ?
समाजक अन्धकार पक्ष मे नारी सशक्तिकरणके बात कयल जाइत अछि, यद्यपि वास्तविकता फरक अछि । नारीके शसक्त बनावके नाममे विभिन्न कार्य सञ्चालन भरहलाक बावजुदो अखनो महिला हिंसा, बालात्कार, आ शोषणके घटनासब घटिरहल अछि ।
एहन स्थिति समाजक किछ अन्धकार पक्ष सबके उजागर करैत अछि । बालिका तथा महिलासभक विरुद्धके अत्याचार अखनो बढिए रहल अछि जाहिस समाजमे नै पत्याबला प्रश्नसब उठी रहल अछि । एकदिस, हमअहा भगवतीक नाममे नारिके पूजा करैत छि मुद्दा दोसर दिस नारीके शरिरीक आ मानसिक यातनाके बात नजरअन्दाज कयल जाइत अछि । विशेष क, बालिका बलात्कारक घटनासब, जेकर शव बिभिन्न स्थानसबमे फेकल गेल अछि , अहिस समाजके एक खतरनाक तस्वीर प्रस्तुत करैत अछि ।
अही सब घटनासब सँ हमराअहाके सोचपर बाध्य कदैत अछि की कत गलत भेल आ एनाकिया भरहल छै ?
महिलाके अधिकारसबके सम्मान करव, हुनका सबके सुरक्षा सुनिश्चित करव, आ समाजमे शान्ति आ समानता स्थापना कारव आब सब गोटेके जिम्मेवारी अछि । एहन अवस्था सुधार के लेल नीति परिवर्तन आ समाजके हरेक सदस्यके योगदान आवश्यक अछि ।














